रिश्वतखोरी मामला: सीबीआई ने ‘गोपनीय विजिलेंस जानकारी’ पर तीन आरोपियों का आमना-सामना कराने की मांग की, पांच दिन की कस्टडी मिली

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Bribery case: CBI seeks to confront three accused based

चंडीगढ़, 8 जून: कथित रिश्वतखोरी मामले में गिरफ्तार पंजाब पुलिस के एक पूर्व कर्मचारी से पूछताछ में गोपनीय विजिलेंस से जुड़ी जानकारी साझा किए जाने का खुलासा हुआ है। इसके बाद चंडीगढ़ की सीबीआई अदालत ने पंजाब विजिलेंस ब्यूरो के एक अधिकारी सहित तीन आरोपियों को आमना-सामना कराने और आगे की जांच के लिए सीबीआई को पांच दिन की पुलिस कस्टडी दे दी है।


अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश हरिंदर सिद्धू की अदालत ने सोमवार को सीबीआई की उस दलील को दर्ज किया, जिसमें कहा गया कि आरोपी ओम प्रकाश सिंह राणा से पूछताछ के दौरान कथित तौर पर अवैध रिश्वत मांगने और स्वीकार करने, गोपनीय विजिलेंस जानकारी साझा करने, इलेक्ट्रॉनिक संचार के आदान-प्रदान, आरोपियों के बीच बैठकों और वित्तीय लेन-देन से जुड़े नए खुलासे हुए हैं। एजेंसी ने सह-आरोपी अंकित वाधवा और राघव गोयल की कस्टोडियल पूछताछ की मांग की, ताकि उन्हें राणा के साथ आमने-सामने बैठाकर पूछताछ की जा सके।
सीबीआई की मांग को स्वीकार करते हुए अदालत ने राणा, वाधवा और गोयल को 12 जून तक पुलिस कस्टडी में भेज दिया।
सीबीआई ने अदालत को बताया कि राणा, जिसने अदालत में आत्मसमर्पण किया था और बाद में गिरफ्तार किया गया, से पूछताछ के दौरान सह-आरोपियों की भूमिका को लेकर नए सुराग मिले हैं।


एजेंसी के वकील ने कहा कि इस बात के महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं कि किस तरह विजिलेंस शिकायतों को कथित तौर पर हासिल किया जाता था, उनकी निगरानी की जाती थी, उन तक पहुंच बनाई जाती थी और शिकायतकर्ताओं तथा जिनके खिलाफ शिकायतें दर्ज थीं, उनसे अवैध वसूली के लिए उनका दुरुपयोग किया जाता था।
सीबीआई ने अदालत को यह भी बताया कि राणा से पूछताछ के दौरान एक अन्य मोबाइल फोन के अस्तित्व का पता चला है, जिसका कथित रूप से साजिश के दौरान इस्तेमाल किया गया था और जिसे अभी बरामद किया जाना बाकी है। एजेंसी के वकील ने तर्क दिया कि इस डिवाइस में रिश्वत की मांग और स्वीकार करने, शिकायतों से जुड़ी जानकारी और सह-आरोपियों के साथ संवाद से संबंधित साक्ष्य हो सकते हैं।


सीबीआई की ओर से पेश हुए लोक अभियोजक अनमोल नरंग ने दलील दी कि यह मामला सिर्फ ट्रैप केस नहीं है, बल्कि एक “गहरी साजिश” है, जिसमें विजिलेंस ब्यूरो से जुड़े अधिकारी कथित रूप से शिकायतकर्ताओं से पैसे ऐंठने का रैकेट चला रहे थे। एजेंसी का कहना है कि साजिश के पूरे दायरे का खुलासा करने और आरोपियों का वित्तीय लेन-देन व अन्य सबूतों के साथ आमना-सामना कराने के लिए आगे की कस्टोडियल पूछताछ जरूरी है।


वहीं बचाव पक्ष के वकील सुमेश जैन ने सीबीआई की मांग का विरोध करते हुए कहा कि एजेंसी द्वारा बताए गए आधार पहले की रिमांड अर्जी का हिस्सा रह चुके हैं और आगे पुलिस कस्टडी की जरूरत को सही ठहराने में एजेंसी असफल रही है। उन्होंने कहा कि ये मांगें अस्पष्ट हैं और न्यायिक हिरासत की मांग की जानी चाहिए।
मामले की केस डायरी और जांच रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद अदालत ने कहा, “तीनों आरोपियों का संयुक्त रूप से आमना-सामना कराने और मोबाइल फोन की बरामदगी सुनिश्चित करने के लिए यह आवश्यक है कि आरोपी ओम प्रकाश सिंह राणा की पुलिस रिमांड बढ़ाई जाए और आरोपी राघव गोयल तथा अंकित वाधवा को भी सीबीआई की पुलिस कस्टडी में दिया जाए।”


अदालत ने अपने आदेश में कहा, “सीबीआई द्वारा ओम प्रकाश सिंह राणा, अंकित वाधवा और राघव गोयल की पांच दिन की पुलिस कस्टडी की मांग स्वीकार की जाती है और इन्हें 12.06.2026 तक पुलिस कस्टडी में भेजा जाता है। सीबीआई द्वारा दायर तीनों अलग-अलग आवेदन स्वीकार किए जाते हैं। तीनों आरोपियों की कस्टडी इंस्पेक्टर कुलदीप सिंह, सीबीआई, एसीबी चंडीगढ़ को सौंपी जाए। उन्हें निर्देश दिया जाता है कि पुलिस रिमांड पर ले जाने से पहले और रिमांड अवधि के दौरान समय-समय पर आरोपियों का चिकित्सकीय परीक्षण कराया जाए।”